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Change in OI: पॉज़िटिव और नेगेटिव आँकड़ों का मतलब

सहायता विषय: Change in OI

Change in OI क्या होता है? किसी Strike (ऑप्शन का तय स्तर) पर अभी खुले कॉन्ट्रैक्ट की संख्या को Open Interest (OI) कहते हैं, और Change in OI बताता है कि पिछले सेशन के क्लोज़ के बाद यह संख्या कितनी बदली। इसे निकालने के लिए आज के OI में से पिछले क्लोज़ का OI घटाया जाता है। NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) की ऑप्शन चैन में इसका लेबल “Chng in OI” है, और यह दोनों तरफ़ OI वाले कॉलम के ठीक बगल में होता है।

पॉज़िटिव Change in OI: ज़्यादा पोज़िशन खुलीं

पॉज़िटिव आँकड़े का मतलब है कि पिछले क्लोज़ के बाद जितने कॉन्ट्रैक्ट बंद हुए, उनसे ज़्यादा नए खुले। सैंपल चैन में Call (ख़रीदने का अधिकार) की तरफ़ सबसे ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट 25,500 पर जुड़े: +52,587। Put (बेचने का अधिकार) की तरफ़ यह आँकड़ा 25,000 पर +53,160 है।

नेगेटिव Change in OI का मतलब

नेगेटिव आँकड़े का मतलब है कि जितने कॉन्ट्रैक्ट खुले, उनसे ज़्यादा बंद हुए: ख़रीदारों ने अपने ऑप्शन बेच दिए और राइटरों (ऑप्शन बेचने वालों) ने पहले बेचे हुए ऑप्शन वापस ख़रीद लिए। यानी पोज़िशन घटाई जा रही हैं, न कि उल्टी दिशा में कोई नया दाँव लगाया जा रहा है। सैंपल में Call की तरफ़ सबसे बड़ी कमी 25,400 पर −8,478 है, और Put की तरफ़ 24,700 पर −9,053।

OI में सबसे बड़े बदलाव, सैंपल चैन
बदलावStrikeChange in OIअभी का OI
सबसे ज़्यादा Call जुड़े25,500+52,5871,48,630
सबसे ज़्यादा Put जुड़े25,000+53,1601,42,960
सबसे ज़्यादा Call बंद हुए25,400−8,47888,450
सबसे ज़्यादा Put बंद हुए24,700−9,05382,610

भाव के साथ मिलाकर पढ़ें

अकेला Change in OI बस इतना बताता है कि कितनी पोज़िशन जुड़ीं या हटीं, यह नहीं कि ऐसा किसने किया। उसी कॉन्ट्रैक्ट के भाव का बदलाव साथ रखकर देखने से ज़्यादा पता चलता है। OI बढ़े और भाव भी बढ़े, तो इसे Long Buildup कहते हैं। OI बढ़े और भाव घटे, तो Short Buildup। OI घटे और भाव बढ़े, तो Short Covering। OI और भाव दोनों घटें, तो Long Unwinding। चारों को OI Buildup के पाठ में अलग-अलग समझाया गया है।

उदाहरण के लिए, सैंपल में 25,500 के Call में 52,587 कॉन्ट्रैक्ट जुड़े, जबकि उसका भाव ₹25.45 गिरा: यह Short Buildup है।

Change in OI और वॉल्यूम का फ़र्क़

वॉल्यूम बताता है कि आज कुल कितने कॉन्ट्रैक्ट का सौदा हुआ। Change in OI सिर्फ़ शुद्ध बदलाव गिनता है: इन सौदों के बाद कुल मिलाकर कितनी पोज़िशन जुड़ीं या कम हुईं। 25,500 पर Call के 4,76,438 कॉन्ट्रैक्ट का सौदा हुआ, लेकिन Open Interest 52,587 बढ़ा: दिन का ज़्यादातर कारोबार पहले से खुली पोज़िशन के हाथ बदलने का था, या ऐसी पोज़िशन का जो इसी सेशन में खुलीं और बंद भी हो गईं।

नई पोज़िशन कहाँ जुड़ीं

Change in OI को एक-एक Strike पर अलग से नहीं, सभी Strike पर एक साथ पढ़ें। सैंपल में जिस Strike पर सबसे ज़्यादा Call जुड़े, वह स्पॉट से 320 पॉइंट ऊपर है, और जिस पर सबसे ज़्यादा Put जुड़े, वह 180 पॉइंट नीचे। ट्रेडर अक्सर इस पैटर्न को ऐसे पढ़ते हैं कि राइटर मौजूदा स्तर के दोनों तरफ़ पोज़िशन जोड़ रहे हैं। यह तस्वीर बताती है कि आज पोज़िशन कहाँ जुड़ीं, यह नहीं कि इंडेक्स किधर जाएगा।

ध्यान रखने वाली बातें

  • Change in OI पिछले क्लोज़ से नापा जाता है, इसलिए हर सेशन में यह फिर शून्य से शुरू होता है।
  • जब कोई ट्रेडर अपनी पोज़िशन अगली एक्सपायरी में रोल करता है, यानी इस एक्सपायरी में बंद करके अगली में वैसी ही पोज़िशन खोलता है, तो इस एक्सपायरी का OI घटता है और अगली का बढ़ता है।
  • एक्सपायरी क़रीब आने पर कई पोज़िशन सेटलमेंट तक रखने के बजाय पहले ही बंद कर दी जाती हैं। चैन में यह नेगेटिव Change in OI के रूप में दिखता है।
  • सभी Strike का Change in OI जोड़कर Put और Call की तुलना करने पर पूरे सेशन की एक तस्वीर मिलती है, लगभग वैसे ही जैसे PCR (Put-Call Ratio) खुली पोज़िशन की तस्वीर देता है।

संबंधित पाठ

सैंपल चैन खोलें और किसी भी आँकड़े को चुनकर उसका मतलब पढ़ें।

यह शैक्षिक सामग्री है, निवेश सलाह नहीं। यहाँ का हर आँकड़ा एक सिंथेटिक सैंपल चैन से है, लाइव भाव नहीं। उपयोग की शर्तें भी देखें।

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